रतलाम। शहर की ऐतिहासिक धरोहर गुलाब चक्कर एक बार फिर सुरों और संगीत की मधुर फिजाओं से गूंज उठा, जब त्रक धा म्युजिकल ग्रुप द्वारा आयोजित भव्य संगीतमय संध्या रफ्ता रफ्ता देखो आँख मेरी लड़ी है में शहरभर के संगीत प्रेमियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर सदाबहार फिल्मी गीतों का भरपूर आनंद लिया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता तालियों की गड़गड़ाहट और वाहवाही के बीच कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
कार्यक्रम का सबसे यादगार और विशेष आकर्षण वह पल रहा जब ग्रुप ओनर देव सर और गायिका गीता बोरासी ने पहली बार युगल स्वर में इन नशीली आँखों से यूँ न देखो बार-बार प्रस्तुत किया। दोनों कलाकारों की शानदार केमिस्ट्री और सुरों की मधुरता ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। पूरे परिसर में देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
देव सर ने रफ्ता रफ्ता देखो आँख मेरी लड़ी है इन नशीली आँखों से यूँ न देखो और "जाते हो परदेश पिया जैसे लोकप्रिय गीतों से कार्यक्रम में रोमांटिक रंग घोल दिया। वहीं रतन चौहान ने कौन है जो सपनों में आया तुम्हारी नज़र क्यों खफा हो गई और रात के हमसफ़र की शानदार प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कृष्णकांत महावर ने अब मुझे रात दिन तेरे हम ऐ सनम और कभी रोते हैं, कभी हँसते हैं से अपनी गायकी का जादू बिखेरा। गीता बोरासी ने भूली बिसरी एवं सारी दुनिया प्यारी प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। मीना महावर ने ले गई ले गई तेरा साथ है कितना प्यारा और छेड़ो ना मेरी ज़ुल्फ़ें से माहौल को खुशनुमा बना दिया। सुरेखा माना ने कहें तोसे सजना रात के हमसफ़र और छू लेने दो नाज़ुक होठों को" जैसे गीतों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इसके अलावा राजेश मना अशोक मेहता माया वर्मा ने सदाबहार प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर त्रक धा म्युजिकल ग्रुप की प्रतिभाशाली गायिका सुरेखा माना के बीआरसी (BRC) पद पर चयन होने पर ग्रुप के सभी सदस्यों ने उनका सम्मान करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। वहीं अतिथि कलाकार आदरणीय भेरूलाल परमार की गरिमामयी उपस्थिति और स्नेहिल आशीर्वाद ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं गरिमामय संचालन देवेंद्र सिंह भदौरिया ने किया, जबकि अंत में रतन चौहान ने सभी अतिथियों, कलाकारों, संगीत प्रेमियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
गुलाब चक्कर पर आयोजित यह संगीतमय शाम न केवल पुराने सदाबहार गीतों की मधुर यादों को ताज़ा कर गई, बल्कि यह भी साबित कर गई कि रतलाम में संगीत के प्रति लोगों का प्रेम आज भी उतना ही जीवंत है। कार्यक्रम की सफलता पर उपस्थित संगीत प्रेमियों ने त्रक धा म्युजिकल ग्रुप के इस सराहनीय प्रयास की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत