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रेल मंत्रालय ने देश के चुनिंदा रेलवे स्टेशनों पर निजी एजेंसी के माध्यम से 24 घंटे यात्री पूछताछ सेवा शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन नीमच के संदर्भ में यह एक बड़ा प्रश्न भी खड़ा करता है—जब वर्षों से स्वीकृत बुनियादी परियोजनाएं ही पूरी नहीं हो पा रही हैं, तब नई घोषणाओं का लाभ जनता तक कब पहुंचेगा? नीमच रेलवे स्टेशन पहले मॉडल स्टेशन योजना और बाद में अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल हुआ। इसके बावजूद लगभग पांच वर्षों बाद भी स्टेशन का समग्र विकास अधूरा है। फुट ओवरब्रिज पूर्ण नहीं हो पाया, प्लेटफॉर्म क्रमांक-4 का निर्माण अधूरा है और यात्रियों को लगातार असुविधा झेलनी पड़ रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि स्टेशन पर लिफ्ट लगाने की स्वीकृति को लगभग एक दशक बीत चुका है, लेकिन सुविधा आज तक शुरू नहीं हो सकी। वहीं बघाना सहित रेलवे अंडरब्रिजों में हर वर्ष होने वाला जलभराव भी स्थायी समस्या बना हुआ है। हैरानी की बात यह भी है कि पिछले कई वर्षों से नीमच के प्रतिनिधि रेलवे सलाहकार समिति में रहे हैं। बैठकों में स्थानीय मुद्दे उठने के बावजूद स्वीकृत परियोजनाएं धरातल पर पूरी नहीं हो सकीं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जवाबदेही आखिर तय किसकी होगी? अब गैस पाइपलाइन परियोजना पर भी सवाल रेलवे परियोजनाओं की तरह ही शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और सीएनजी (CNG) नेटवर्क का मामला भी सवालों के घेरे में है। मार्च 2022 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) की सहयोगी कंपनी मेघा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को नीमच, मंदसौर, आगर मालवा और राजस्थान के झालावाड़ सहित कई जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य सौंपा था। करीब चार वर्ष बीत जाने के बाद भी यदि नीमच में कार्य अपेक्षित गति से शुरू नहीं हुआ है या पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है, तो इसका कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि देरी की वजह क्या है और परियोजना कब पूरी होगी। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से जवाब की अपेक्षा यदि रेलवे स्टेशन का विकास वर्षों से अधूरा है और गैस पाइपलाइन जैसी महत्वपूर्ण परियोजना भी समय पर आगे नहीं बढ़ रही, तो यह केवल एजेंसियों का ही नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था का भी विषय बन जाता है। जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और प्रशासन को जनता के सामने परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, समय-सीमा और देरी के कारण स्पष्ट करने चाहिए। चंदे का मुद्दा और तथ्यात्मक सावधानी सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) और उससे संबंधित कंपनियां इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को चंदा देने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रही हैं। हालांकि, केवल इस तथ्य के आधार पर किसी परियोजना में देरी या किसी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यदि दोनों विषयों को एक साथ उठाया जाए, तो उनके बीच प्रत्यक्ष संबंध का दावा तभी किया जाना चाहिए जब उसके समर्थन में प्रमाण उपलब्ध हों। नीमच की जनता अब नई घोषणाएं नहीं, बल्कि समय पर पूरे होते विकास कार्य देखना चाहती है। रेलवे स्टेशन हो या गैस पाइपलाइन—हर स्वीकृत परियोजना की प्रगति, जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होना ही जनहित की सबसे बड़ी मांग है। |