रिपोर्टर: जितेन्द्र कुमावत
सैलाना/रतलाम
सैलाना का ऐतिहासिक श्री रामद्वारा विवाद पहले आस्था और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए सर्व हिंदू समाज के धरने-प्रदर्शन तक सीमित था लेकिन अब इसमें भारी मोड़ आ गया है।
अब उसी धरने के बाद अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय की मुख्य आचार्य पीठ शाहपुरा (राजस्थान) ने 18 जून 2026 को सख्त और अहम आदेश जारी कर दिया है।
मुख्य पीठ के कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम रामस्नेही द्वारा जारी पत्र में साधु रामविलास शास्त्री को रामद्वारा सैलाना के व्यवस्थापक पद से तुरंत निष्कासित कर दिया गया है।
मुख्य पीठ ने स्पष्ट किया कि स्वर्गीय महंत निर्मलराम जी महाराज के निधन के बाद रामविलास शास्त्री सेवा-पूजा और व्यवस्थापक के रूप में कार्यरत थे लेकिन उन्होंने रामद्वारा परिसर की संपत्ति के एक हिस्से का कथित असंवैधानिक तरीके से विक्रयपत्र कराया। मुख्य पीठ को इसकी जानकारी मिलने के बाद 14 अगस्त 2025 को ही नगर परिषद सैलाना में नामांतरण निरस्त करने का आवेदन दिया गया था।
बार-बार समझाइश के बावजूद पौराणिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने आदेशों की अवहेलना और जन-आस्था को ठेस पहुंचाने के आरोप में यह बड़ी कार्रवाई की गई है। अब अगले आदेश तक रामद्वारा सैलाना का पूरा प्रबंधन मुख्य पीठ शाहपुरा के अधीन रहेगा।
मुख्य पीठ ने दिलीप सिंह गौड कृष्णा कुंवर गौड और जितेंद्र प्रजापत का रामस्नेही सम्प्रदाय से कोई लेना-देना नहीं होने की बात साफ की है और उन पर धार्मिक संपत्ति पर कुदृष्टि रखने का आरोप लगाया है।
जिला प्रशासन से मांग की गई है कि दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए और उन्हें रामद्वारा परिसर में प्रवेश से प्रतिबंधित किया जाए।
विवादित विक्रय पत्र को शून्य घोषित करवाने के लिए जल्द न्यायालय में वाद दायर करने की भी तैयारी बताई गई है। बिना मुख्य पीठ की अनुमति के धार्मिक सत्संग के अलावा किसी अन्य गतिविधि को असंवैधानिक माना जाएगा।
पहले धरना अब प्रशासनिक और धार्मिक स्तर पर बड़ा एक्शन
गुरुवार को सर्व हिंदू समाज के आह्वान पर सैलाना में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। विशाल जुलूस पैलेस चौराहा बस स्टैंड घंटाघर होते हुए रामद्वारा पहुंचा। SDM तरुण जैन SDOP नीलम बघेल तहसीलदार कुलभूषण शर्मा सहित प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। भक्तों ने शासकीय संपत्ति के गलत विक्रय रजिस्ट्री रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग की थी ।
अब मुख्य पीठ के निष्कासन आदेश के बाद पूरा मामला और गंभीर हो गया है!
सैलाना थाना में FIR नंबर 0199/2026 दर्ज हुई। आरोपी रामविलास शास्त्री पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 298 299 302 324(2) और 329(4) के तहत मामला है। आरोप है कि 30 मई 2026 को स्व. 1008 निर्मल राम शास्त्री की समाधि तोड़ी गई भूमि बेची गई शेष पर स्कूल चलाया जा रहा है और दुकानों से किराया निजी उपयोग में लिया जा रहा है।
नगर परिषद सैलाना ने रामविलास महाराज को नोटिस जारी कर सात दिनों में दुकानों के निर्माण संबंधी दस्तावेज पेश करने को कहा। बिना अनुमति निर्माण और किराए पर देने का आरोप है। अगर दस्तावेज नहीं दिए तो मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि रामद्वारा महंत व्यवस्था और पवित्रता का प्रतीक है। मुख्य पीठ के आदेश के बाद भक्तों में नई उम्मीद जगी है।
मुख्य पीठ के निष्कासन आदेश न्यायालय जाने की घोषणा और नगर परिषद नोटिस के बाद प्रशासन से सभी दस्तावेजों रजिस्ट्री आय-व्यय और अतिक्रमण की गहन जांच की मांग तेज हो गई है। नगरवासी चाहते हैं कि रामद्वारा की मूल परंपरा जल्द बहाल हो।
यह विवाद अब सैलाना से आगे पूरे क्षेत्र और रामस्नेही सम्प्रदाय में चर्चा का विषय बन गया है। सर्व हिंदू समाज ने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मुख्य पीठ शाहपुरा के फैसले ने पूरे प्रकरण को नया और मजबूत आयाम दे दिया है।