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थड़ा में श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के दौरान पं. निरंजन शर्मा ने सुनाए जीवन परिवर्तन के सूत्र चीताखेड़ा । मां अपने बेटे की ममता (मोह) में अपनी सुन्दरता को खो देती है और वही पुत्र पत्नी की सुंदरता के मोह में मां को त्याग देता है।लज्जा, शंका, भय, गिलानी, शील, जाती, धन और अभिमान ये आठों लक्षण जिस व्यक्ति में विद्यमान है ऐसे व्यक्ति को परमात्मा से मिलने में बाधक पहुंचती है । रावण और कंस को अपनी शक्तियों का अभिमान आ गया था पूरे कुल का सर्वनाश हो गया। सदा -सदा का प्रेम केवल परमात्मा का प्रेम हैं,जो कि दिव्य और आध्यात्मिक प्रेम हैं।लोभ जहां व्यक्ति और समाज के लिए नकारात्मक होता है वहीं प्रेम सकारात्मक माना जाता हैं। उक्त प्रेरक उदगार कथा मर्मज्ञ पं. निरंजन शर्मा गादोला ने थडा गांव के स्थित घाटी वाले बालाजी मंदिर पर श्रीराम पक्षी दाना समिति थडा के तत्वावधान में क्षेत्र वासियों के सहयोग से श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा साप्ताहिक महोत्सव के दौरान 6 टें दिन शनिवार को मौजूद श्रौताओ को प्रवाहित करते हुए कही।कहा कि अभिमानी व्यक्ति को सही दिखना और सही सुनना बंद हो जाता हैं।गोपियों को भी अभिमान हो गया था उनके अभिमान को तोडऩे और राधा के मान को रखने के लिए श्रीकृष्ण कुछ पल के लिए अदृश्य हो गए थे।जब-जब भी धरती पर पाप बडे है तब-तब धरती पर संत ही आगे आए हैं। त्रेतायुग में रावण का पाप बडा तो विश्वामित्र और द्वापर युग में कंस का पाप बडा तो व्यास जी आगे आए।श्रीमद भागवत कथा श्रवण करने से मनुष्य को कल्याण की प्राप्ति होती है एवं व्यक्ति के जीवन में किसी प्रकार के कष्ट नहीं आते हैं। पं. निरंजन शर्मा ने श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा का रसा स्वादन करवाते हुए कहा कि जहां प्रेम होता है वहां कृष्ण होते हैं, कृष्ण ने कुब्जा की कूबड निकालकर सुन्दर नारी बनाया। नहाने से तन की, भगवान की भक्ति करने से मन की और दान करने से धन की शुध्दि होती हैं। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान अक्रूर, श्रीकृष्ण का मथुरा गमन, नंदराय, राधा, कुब्जा, कालिया वन, बलराम, जरासंध, राजारुकमणी, शिशुपाल, कंस वध, मुचुकुन्द, उध्दव ज्ञान, आदि धार्मिक प्रसंगों को विस्तार से महत्व प्रतिपादित किया। श्री कृष्ण - रुक्मिणी विवाह में इन्होंने निभाया शानदार किरदार कथा पंडाल में भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी विवाह की जिवंत झांकी दर्शाई गई। शानदार अभिनय में मां कात्यायनी देवी - चेष्टा गायरी,भगवान श्रीकृष्ण - ( कु. निष्ठा गायरी),--.रुकमणी.--( कु. खुशी गायरी), सखी- ( कृतिका,रुचिता सुथार, सिया टेलर, खुशी शर्मा) ने मनमोहक एवं आकर्षक भूमिका निभाई। श्री कृष्ण और रुक्मिणी ने व्यासपीठ पर विवाह रस्म अदायगी की गई और एक दूसरे को वरमाला पहनाई। हथेले में एकत्र हुई राशि 13 हजार 500 रुपए कथा वाचक पंडित निरंजन शर्मा ने पक्षी टावर निर्माण कार्य हेतु समिति को सौंपी। कल 31 को होगी कथा की पूर्णाहुति श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा साप्ताहिक कथा महोत्सव के अंतिम दिवस 31 मई 2026 रविवार को सुदामा चरित्र, उध्दवज्ञान, राजा परीक्षित मोक्ष प्रंसग का वृत्तांत पर कथा प्रवचन पं.निरंजन शर्मा के मुखारविंद से ज्ञान वर्षा प्रवाहित की जाएगी। हवन पूजन एवं महाआरती के पश्चात महाप्रसाद वितरण के साथ साप्ताहिक ज्ञान गंगा कथा का विश्राम होगा।आयोजक समिति सदस्यों ने क्षेत्र की समस्त धर्मप्रेमी जनता से अनुरोध कियाहैं कि अधिक से अधिक संख्या मे पहुंच कर लाभ उठावें। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |