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बच्चों के सामने बड़ों को बूरे व्यसनों का व्यसन को नहीं करना चाहिए --पं. डॉ बबलू वैष्णव चीताखेडा। समीपस्थ ग्राम माताकाखेडा में स्थित आरोग्य देवी महामाया आवरी माताजी मंदिर परिसर में क्षेत्र वासियों द्वारा आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन में छःठे दिन मंगलवार को आसमान से बरसती भीषण गर्मी की परवाह किए बगैर कथा वाचक पंडित डॉ बबलू वैष्णव जलोदिया केलूखेडा की कथा में भागवत प्रसंग का वर्णन जिस प्रकार साधारण मालवी शैली में की जा रहा है जिसको सुनना जनमानस को खूब भा रहा है। संक्षिप्त भी उनकी एक विशेषता है किसी प्रसंग को अनावश्यक नहीं बढ़ाते हुए वे सीधे मानव मन पर प्रहार करते है। खासकर व्यसन त्याग करने को लेकर मांस मदिरा का सेवन करने वाले व्यक्तियों को निशाना बना रहे हैं वहीं व्यसन का त्याग करने वाले भी प्रेरित होकर त्याग करने हेतु आगे आकर संकल्प भी ले रहे हैं। इस अलौकिक भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन में अपने आपको खुद को अभीभूत महसूस कर रहे हैं। नन्दोत्सव के साथ कथा का छठा दिन उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। चारों ओर आनंद मन रहा है, इस समय नंदबाबा ने दान दिया है और उन्होंने बताया कि कलयुग में दान ही एक ऐसी वस्तु है जो भगवान तक पहुंचाता है। मनुष्य को चिंता नहीं प्रभु का चिंतन करें। उक्त बात कथा वाचक पंडित डॉ बबलू वैष्णव जलोदिया केलूखेडा ने आवरी माताजी में चल रही भागवत कथा के छठे दिन कहीं। बच्चों के सामने कभी बूरे व्यसन का उपयोग नहीं करना चाहिए।घर में बच्चों से मांस,मदिरा, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू जैसे बुरे व्यसन खाना मत सिखाना और ना ही बाजार में लेने भी मत भेजना बल्कि मंदिर जाते समय साथ ले जाना और पाठ, पूजा- अर्चना करना सिखाना। *रासोत्सव का आयोजन -*--- कथा के मध्य भाग में रासोत्सव का वर्णन आया जहां भगवान की रासलीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह ये संसार भगवान का रास है।हम सबके अंदर वह बैठे हैं।रास के द्वारा कामनाओं का दमन होता है भगवान ने गोपियों के साथ मिलकर रासलीला करी और उनकी कामनाओं का हरण किया। आज के समय में हम रासलीला को गलत अर्थों में लेते हैं। पुरुषोत्तम मास के महत्व को समझाते हुए कहा कि पुरुषोत्तम मास में दान करने का बड़ा महत्व है। पुराणों में पुरुषोत्तम मास अन्नदान,जलदान,गौ दान, वस्त्र दान तथा विद्या दान को विशेष पुण्यकारी कहा गया है। पंडित डॉ श्री वैष्णव ने कथा रसास्वादन करवाते हैं कहा कि कंस के ससुर मगद देश के राजा जरासंध ने मथुरा पर 23 अक्षुणी सेना जिसमें एक अक्षुणी सेना में 21 हजार 870 रथ,21 हजार 870 हाथी, एक लाख नौ हजार 350 घोड़े, एक लाख नौ हजार 350पैदल सैनिकों को लेकर 17 बार आकृमण किया। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान अक्रूर जी, श्री कृष्ण का मथुरा गमन, नंदराय,राधा रानी,कुब्जा, कालिया वन, बलराम,जरासंध,राजा रुकमणी, शिशुपाल,सांदीपनि आश्रम में शिक्षा, कंस वध, रुक्मणी विवाह आदि धार्मिक प्रसंगों को विस्तार से महत्व प्रतिपादित किया गया। कल होगी कथा की पूर्णाहुति - श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन कथा महोत्सव के अंतिम दिन दिवस 27 मई 2026 बुधवार को सुदामा चरित्र, उद्भव ज्ञान प्रसंग का वर्णन पर प्रवचन पंडित डॉ बबलू वैष्णव जलोदिया केलूखेडा के मुखारविंद से ज्ञान वर्षा प्रवाहित की जाएगी।हवन पूजन एवं महाआरती के पश्चात् आरोग्य देवी महामाया आवरी माताजी मंदिर समिति की ओर से कथा की पूर्णाहुति के मौके पर महाप्रसाद रखी गई है। महाप्रसाद वितरण के साथ भागवत ज्ञान गंगा कथा का विश्राम होगा। आयोजक समिति ने क्षेत्र की समस्त धर्म प्रेमी जनता से अनुरोध किया है कि अधिक से अधिक संख्या में निर्धारित समय पर पहुंचकर धर्म लाभ उठाएं। |