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आरोग्य देवी आवरी माताजी दरबार में बह रही श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा चीताखेड़ा : शब्द चयन, भाषा का प्रवाह और भाषाशैली व्यक्ति के व्यक्तित्व को उजागर करते हैं। व्यंग्य और उपहास ही महाभारत युद्ध का कारण बने थे। व्यक्ति अपनी भाषा और बोली से दुनिया जीत सकता है। मर्यादित भाषा जहां अनजान लोगों का भी मन मोह लेती है, वहीं कुत्सित और दूषित भाषा अपनों को भी पराया बना देती है। आज का मानव अंधविश्वास में उलझकर धर्म की राह से भटकता जा रहा है। यह उद्गार कथा वाचक पं. डॉ. बबलू वैष्णव ने आरोग्य देवी महामाया आवरी माताजी मंदिर परिसर में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दूसरे दिन व्यक्त किए। क्षेत्रवासियों के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक आयोजन में शुक्रवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रवचन के दौरान पं. वैष्णव ने कहा कि यदि शब्दों का प्रवाह नदियों की तरह मर्यादा में बंधा रहे तो वह खुशहाली लाता है, लेकिन जब मर्यादा टूटती है तो वही विनाश और विभीषिका का कारण बनती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब भाषा और बोली ने अपनी गरिमा छोड़ी है, तब-तब तबाही आई है। उन्होंने कहा कि नींद में सोए व्यक्ति को माता-पिता या कोई भी जगा सकता है, लेकिन अज्ञान की नींद में सोए इंसान को केवल परमात्मा की भक्ति और सत्संग ही जागृत कर सकते हैं। धर्म के नाम पर अंधविश्वास करने वाले लोग वास्तविक धर्म मार्ग से दूर होते जा रहे हैं। कथा के दौरान देवहूति, भगवान कपिल, सुखदेव मुनि, उत्तानपाद, ध्रुव, सुनिती और सुरुचि के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रतिदिन श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन दोपहर 11:30 बजे से शाम 3 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। कथा समिति के सदस्यों ने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। रिपोर्ट : दशरथ माली |