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भगवान से प्रेम करना यही मनुष्य जीवन की सार्थकता है... मंदसौर। जिले के गरनाई गांव में श्री राम जानकी मंदिर प्रांगण में चल रही पंडित बृजेश पाराशर के मुखारविंद से श्रीमद भागवत कथा ने भक्तों को भक्ति के रंग में रंग दिया है। आयोजनकर्ता नरेंद्र सिंह चंद्रावत परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय कथा का छठवां दिन विशेष रूप से यादगार रहा, जहां कथावाचक पंडित बृजेश पाराशर ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का मनमोहक वर्णन किया। कथा के इस हिस्से में कथावाचक ने रास पंचाध्याय का भावपूर्ण चित्रण किया जिसमें श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के बीच अटूट प्रेम समर्पण और श्रद्धा की अनुपम कथा बुनी गई। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम इतना गहन था कि उन्होंने स्वयं को उनके चरणों में समर्पित कर दिया। यह प्रसंग न केवल प्रेम की मिसाल है बल्कि सच्ची भक्ति का प्रतीक भी है जहां भक्त और ईश्वर का मिलन दिव्य ऊर्जा का स्रोत बन जाता है। कथावाचक ने जोर देकर कहा कि मनुष्य जीवन की सार्थकता सेवा और भगवान के प्रति अटूट प्रेम में निहित है। सेवा करना और प्रेम करना ही जीवन का मूल मंत्र है उन्होंने भक्तों को संदेश दिया। कथा के दौरान मंदिर प्रांगण में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी की जीवंत झांकी सजाई गई जो भक्तों के लिए आनंद का केंद्र बनी। भक्तिमय वातावरण में आरती भजन और कीर्तन की धुनें गूंजती रहीं। श्रद्धालु इस दृश्य को निहारते हुए भावविभोर हो उठे। झांकी में श्रीकृष्ण की वेणुधारी मुद्रा और रुक्मिणी की लज्जावती छवि ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव का रूप ले चुका है बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गया है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि ऐसी कथाओं से गांव में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कथा का समापन निकट है और अंतिम दिन में और भी रोचक प्रसंग सुनाए जाने की उम्मीद है। चंद्रवत परिवार ने सभी भक्तों का स्वागत किया तथा प्रसाद वितरण का आयोजन किया। |