रतलाम। चातुर्मास के पावन अवसर पर शहर के सगोद रोड स्थित प्राचीन श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह धार्मिक आयोजन पूज्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद में श्री रामचंद्र नागर तथा खेड़ापति हनुमान संस्था के तत्वावधान में प्रारंभ किया गया। शुभारंभ के साथ ही मंदिर परिसर श्रीराम नाम के जयघोष, वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन से भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
इस अवसर पर पूज्य महामंडलेश्वर आनंद गिरि जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि, साधना, भक्ति और सेवा का सर्वोत्तम काल है। उन्होंने कहा कि इन चार महीनों में भगवान के नाम का स्मरण, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, जप, तप, स्वाध्याय, सत्संग, दान-पुण्य तथा संत सेवा का विशेष महत्व होता है। जो व्यक्ति चातुर्मास के दौरान धर्म और सेवा से जुड़कर जीवन व्यतीत करता है, उसका जीवन आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत बनता है।
महाराज श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे चातुर्मास के दौरान अधिक से अधिक समय धार्मिक गतिविधियों में लगाएं, परिवार में संस्कारों का वातावरण बनाएं तथा भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला अमूल्य मार्गदर्शक है।
आयोजकों ने बताया कि चातुर्मास की संपूर्ण अवधि में मंदिर परिसर में प्रतिदिन रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, सत्संग, पूजन-अर्चन, संत सेवा एवं अन्य धार्मिक आयोजन नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करेंगे।
इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, भक्तगण एवं धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ में सहभागिता कर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आयोजन की सफलता एवं जनकल्याण की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने इसे चातुर्मास का अत्यंत पुण्यदायी एवं प्रेरणादायी आयोजन बताया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत