सैलाना नगर परिषद की राजनीति में पिछले दो महीनों से चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। इंदौर हाईकोर्ट ने नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला के वित्तीय अधिकार छीनने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से अध्यक्ष शुक्ला को बड़ी कानूनी राहत मिली है, वहीं स्थानीय राजनीति में इसे बड़ा झटका माना जा रहा है उन नेताओं के लिए जिन्होंने यह कानूनी लड़ाई शुरू की थी।
मामला तब गरमाया था जब कांग्रेस पार्षद सलोनी मांडोत के पति प्रशांत मांडोत और पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नर्मता राठौर के पति तथा पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राठौड़ ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि राज्य शासन द्वारा संबंधित गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया, इसलिए वर्तमान अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला को वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए। इस मांग ने सैलाना की राजनीति में हलचल मचा दी थी।
सबसे खास बात यह रही कि यह याचिका कांग्रेस से जुड़े नेताओं द्वारा ही दायर की गई, जबकि अध्यक्ष भी कांग्रेस समर्थित माने जाते हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हर्षविजय गेहलोत ने दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राठौड़ और वर्तमान पार्षद सलोनी मांडोत को छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया।
10 अप्रैल को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने तत्काल वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 13 मई को आए अंतिम आदेश में कोर्ट ने याचिका पूरी तरह निरस्त कर दी। इस फैसले के बाद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला के वित्तीय अधिकार यथावत बने रहेंगे।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत
सैलाना नगर परिषद में सियासी घमासान : हाईकोर्ट से अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला को बड़ी राहत, वित्तीय अधिकार छीनने की याचिका खारिज....
सैलाना नगर परिषद की राजनीति में पिछले दो महीनों से चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। इंदौर हाईकोर्ट ने नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला के वित्तीय अधिकार छीनने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से अध्यक्ष शुक्ला को बड़ी कानूनी राहत मिली है, वहीं स्थानीय राजनीति में इसे बड़ा झटका माना जा रहा है उन नेताओं के लिए जिन्होंने यह कानूनी लड़ाई शुरू की थी।
मामला तब गरमाया था जब कांग्रेस पार्षद सलोनी मांडोत के पति प्रशांत मांडोत और पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नर्मता राठौर के पति तथा पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राठौड़ ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि राज्य शासन द्वारा संबंधित गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया, इसलिए वर्तमान अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला को वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाने चाहिए। इस मांग ने सैलाना की राजनीति में हलचल मचा दी थी।
सबसे खास बात यह रही कि यह याचिका कांग्रेस से जुड़े नेताओं द्वारा ही दायर की गई, जबकि अध्यक्ष भी कांग्रेस समर्थित माने जाते हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हर्षविजय गेहलोत ने दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राठौड़ और वर्तमान पार्षद सलोनी मांडोत को छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया।
10 अप्रैल को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने तत्काल वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 13 मई को आए अंतिम आदेश में कोर्ट ने याचिका पूरी तरह निरस्त कर दी। इस फैसले के बाद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला के वित्तीय अधिकार यथावत बने रहेंगे।