रतलाम / सैलाना
नगर परिषद सैलाना की राजनीति अब खुली जंग में बदल चुकी है। जिला कांग्रेस कमेटी रतलाम द्वारा पूर्व पार्षद जितेन्द्र सिंह राठौर, पार्षद सलोनी माण्डोत और प्रशांत माण्डोत को 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित करने का फैसला सामने आते ही सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई ने न केवल संगठन के भीतर दरार को उजागर किया है, बल्कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट से शुरू हुआ विवाद, निष्कासन तक पहुँचा मामला
पूरे विवाद की जड़ वह याचिका बनी, जो हाईकोर्ट इंदौर में नगर परिषद सैलाना के अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों को शून्य करने के लिए दायर की गई। जिला अध्यक्ष हर्षविजय गेहलोत ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया और संतोषजनक जवाब न मिलने पर सख्त कार्रवाई करते हुए तीनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
हमने सरकार की खामी उजागर की, पार्टी का नुकसान नहीं
जितेन्द्र सिंह राठौर ने अपने जवाब में साफ कहा कि यह याचिका किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शासन स्तर पर नगर परिषदों को गजट नोटिफिकेशन के जरिए वित्तीय अधिकार न दिए जाने की खामी को उजागर करने के लिए दायर की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनके 38 वर्षों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी पार्टी का नुकसान नहीं किया, बल्कि हर परिस्थिति में कांग्रेस और गेहलोत परिवार के साथ खड़े रहे।
अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला पर आरोपों की झड़ी
निष्कासित नेताओं ने नगर परिषद अध्यक्ष पर एक के बाद एक गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें शामिल हैं—
3 वर्षों से विकास कार्यों पर रोक: वार्डों में जानबूझकर विकास कार्य नहीं होने देना
व्यक्तिगत द्वेष और भेदभाव: विरोध करने वाले पार्षदों के वार्डों को नजरअंदाज करना
पानी संकट की अनदेखी: मजबूरी में खुद के खर्च से ट्यूबवेल, पाइपलाइन और करीब 70 टैंकर पानी की व्यवस्था करना
टैंकर रोकने के निर्देश: अधिकारियों को वार्ड में पानी टैंकर न भेजने के मौखिक आदेश
PIC सदस्य से हटाना: बिना सूचना और कारण के पद से हटाया जाना
ट्यूबवेल कार्यों में बाधा: मोटर लगाने और अन्य कामों में प्रशासनिक अड़चन
बिजली कनेक्शन कटवाना: 2025 में ट्यूबवेल का कनेक्शन कटवाना, बाद में विधायक हस्तक्षेप से बहाल
CCTV और विकास योजनाएं
रोकना: वार्ड में कैमरे नहीं लगने देना, 3.60 लाख का फाउंटेन व सौंदर्यीकरण कार्य बंद कराना
सार्वजनिक अपमान: रावण दहन जैसे आयोजनों में मंच से दूर रखना
टैक्स बढ़ाया, विकास ठप—जनता पर बोझ का आरोप
नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर परिषद द्वारा 3 से 5 गुना तक टैक्स वृद्धि की गई, जो नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद पानी सप्लाई में कोई सुधार नहीं हुआ—पहले की तरह ही 15 दिन में पानी मिल रहा है, बल्कि समय और कम कर दिया गया। इससे आम जनता में भारी नाराजगी है।
नगर की हालत बदहाल - सार्वजनिक संपत्तियों की अनदेखी
स्पष्टीकरण में नगर के कई प्रमुख स्थलों की बदहाली का भी जिक्र किया गया—
गौधुलिया तालाब का गार्डन, विक्टोरिया तालाब का फाउंटेन, किर्ति स्तंभ बगीचा, घंटाघर की घड़ी, बस स्टैंड का गोलचक, खेल मैदान और सार्वजनिक सुविधाएं—all जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। आरोप है कि पूर्व परिषद के कार्यों को भी जानबूझकर खराब स्थिति में छोड़ दिया गया।
पुरानी रंजिश और साजिश?
राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान अध्यक्ष पहले भी अपनी ही पार्टी के खिलाफ धरनों में शामिल रहे और 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ काम किया। साथ ही, पुराने राजनीतिक विवादों का बदला लेने की मानसिकता से कार्य करने का आरोप भी लगाया गया।
सवाल उठाए, जवाब नहीं मिला—सीधे निष्कासन
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अध्यक्ष पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया, लेकिन आरोप लगाने वालों पर ही कार्रवाई कर दी गई। इससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।
निष्कासित नेताओं का ऐलान:
जनता की लड़ाई जारी रहेगी
कार्रवाई के बाद नेताओं ने दो टूक कहा— हमें पद से हटाया जा सकता है, लेकिन जनसेवा से नहीं रोका जा सकता। हम जनता के हक के लिए लड़ते रहेंगे, चाहे उसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
सैलाना की सियासत में आगे क्या?
यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस संगठन के भीतर गहरे मतभेदों की ओर इशारा करता है। एक तरफ अनुशासन का हवाला देकर की गई कार्रवाई है, तो दूसरी ओर जनहित और पारदर्शिता के नाम पर उठे सवाल।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पार्टी इस विवाद को सुलझा पाएगी या यह सियासी महाभारत आने वाले चुनावों में बड़ा असर डालेगा। फिलहाल, सैलाना की राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़े रूप में सामने आ सकता है।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत