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भीलवाड़ा /धोरीमन्ना : क्षेत्र के खरङ गांव में गुरुवार देर रात मानवता,साहस और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा उदाहरण देखने को मिला।रात करीब 2 बजे कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई एक मादा हिरणी को स्थानीय शिक्षक श्रीराम तेतरवाल ने तत्परता और संवेदनशीलता दिखाते हुए न केवल बचाया बल्कि समय रहते उपचार कर उसकी जान भी बचाई। पर्यावरण सेवक व स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई की जानकारी के अनुसार देर रात गांव के आसपास एक मादा हिरणी पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया।कुत्तों के चंगुल में फंसने से हिरणी बुरी तरह घायल हो गई और दर्द से तड़प रही थी।हरिणी के रोने की आवाज सुनकर शिक्षक श्रीराम तेतरवाल तुरंत मौके पर पहुंचे और पड़ोसी पाबूराम डूडी तथा अपने पुत्र अभिनव के सहयोग से हिरणी को कुत्तों से छुड़ाकर सुरक्षित बाहर निकाला।फिर पर्यावरण प्रेमी जगदीश प्रसाद विश्नोई को घटना की जानकारी देने पर रेस्क्यू सेंटर पहूंचाने की सलाह के अनुसार उन्होंने बिना किसी देरी के हिरणी को अपने निजी वाहन से अमृता देवी रेस्क्यू सेंटर कातरला पहुंचाया।देर रात होने के कारण वहां डॉक्टर तत्काल उपलब्ध नहीं हो सके लेकिन श्रीराम तेतरवाल ने हिम्मत नहीं हारी।उन्होंने चिकित्सकों से फोन पर संपर्क कर आवश्यक सलाह ली और उसी मार्गदर्शन में स्वयं प्राथमिक उपचार शुरू किया।समय पर किए गए उपचार और देखभाल से हिरणी की हालत में सुधार आया और उसकी जान बच गई। इस पूरी घटना के दौरान श्रीराम तेतरवाल,पाबूराम डूडी, जगदीश प्रसाद विश्नोई और अभिनव ने कई घंटों तक हिरणी की देखभाल की।क्षेत्र के लोगों ने उनके इस साहसिक और मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जहां लोग अक्सर बेजुबान पशुओं की अनदेखी कर देते हैं वहीं इस प्रकार का कार्य समाज के लिए प्रेरणा है। ग्रामीणों ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।श्रीराम तेतरवाल और उनके सहयोगियों ने जिस संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया वह मानवता की सच्ची मिसाल है।उनके इस प्रयास से न केवल एक बेजुबान जीव का जीवन बचा बल्कि समाज में वन्यजीव संरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश भी गया। रिपोर्ट : राजकुमार गोयल |